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गेंदे के फूलों के बीच जलते मिट्टी के दीये
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दिवाली 2026 कब है? रविवार, 8 नवंबर

दीपावली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त दिल्ली में शाम 5:54 से 7:50 बजे तक है। कुछ कैलेंडर 9 तारीख़ पर अमावस्या दिखाते हैं, पर उस शाम तक वह ख़त्म हो चुकी होती है, इसलिए पूजा 8 को है। अपने शहर का समय नीचे चुनिए।

festcountdown टीम ने दृक गणित पंचांग से जाँचा, आख़िरी बार 17 सितंबर 2026 को।

दिवाली में बाकी
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रविवार, 8 नवंबर 2026 · लक्ष्मी पूजा
दिवाली 2026 दिल्ली समय

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

पूजा का समय, नई दिल्ली के लिए।
5:54–7:50 PM
रविवार, 8 नवंबर 2026 · कार्तिक अमावस्या
  • यही समय क्यों
    प्रदोष काल + स्थिर लग्न
    इसका मतलब: पूजा सूर्यास्त के बाद, वृषभ (स्थिर) लग्न में होती है। स्थिर राशि इसलिए चुनी जाती है ताकि लक्ष्मी घर में टिकें।
  • पूरा प्रदोष काल
    लगभग 5:31–8:09 PM
    इसका मतलब: सूर्यास्त के बाद का शाम वाला समय। मुख्य मुहूर्त इसी के भीतर है।
  • तिथि
    कार्तिक अमावस्या
    इसका मतलब: 8 नवंबर सुबह 11:27 से 9 नवंबर दोपहर 12:31 तक। 8 की शाम इसके भीतर है, इसलिए पूजा 8 को है।
ये नई दिल्ली के समय हैं। प्रदोष काल आपके शहर के सूर्यास्त से शुरू होता है, जो कोलकाता में लगभग आधा घंटा पहले और मुंबई में आधा घंटा बाद है। वृषभ लग्न वाली अवधि भी खिसकती है, क्योंकि लग्न इस पर निर्भर है कि आपका शहर नक़्शे पर कहाँ है।

मुहूर्त और चौघड़िया कैलकुलेटर

रविवार, 8 नवंबर 2026 · लक्ष्मी पूजा · शहर चुनते ही समय बदल जाएगा

सूर्योदय
6:38 AM
सूर्यास्त
5:32 PM
प्रदोष काल
5:32–8:09 PM

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, जो सूर्यास्त से रात के पाँचवें हिस्से तक चलता है। अपना शहर चुनकर देखिए कि आपके यहाँ यह कब है। 5:54–7:50 PM वाली वृषभ अवधि दिल्ली की है।

दिन का चौघड़िया

रात का चौघड़िया

सूर्योदय, सूर्यास्त, प्रदोष काल और चौघड़िया का समय आपके चुने हुए शहर के हिसाब से है। वृषभ काल जैसे लग्न मुहूर्त नई दिल्ली के समय से दिए गए हैं।

दिवाली 2026 कब है?

दीपावली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। तिथि कार्तिक अमावस्या है, जो 8 तारीख़ सुबह 11:27 से 9 तारीख़ दोपहर 12:31 तक रहेगी। पूजा के लिए अमावस्या के भीतर एक शामचाहिए। 8 को वह मिलती है, और 9 की शाम तक अमावस्या बीत चुकी होती है।

कुछ कैलेंडर 9 नवंबर क्यों दिखाते हैं

9 नवंबर की सुबह भी अमावस्या चल रही होती है। जो कैलेंडर हर दिन के आगे सूर्योदय वाली तिथि लिखता है, वह अमावस्या 9 तारीख़ पर दिखाएगा। लक्ष्मी पूजा शाम की तिथि से तय होती है। कैलेंडर में 8 नवंबर लिखिए।

तारीख़ हर साल हफ़्तों आगे-पीछे क्यों होती है

बारह चंद्र महीने मिलाकर लगभग 354 दिन बनते हैं, सौर वर्ष से क़रीब 11 दिन कम। यूँ ही छोड़ दिया जाए, तो दिवाली हर साल 11 दिन पहले खिसकती जाएगी, जैसे रमज़ान खिसकता है। हिंदू कैलेंडर इसे रोकने के लिए लगभग हर 32–33 महीने में एक अधिक मास जोड़ता है। 2026 में अधिक ज्येष्ठ (17 मई–15 जून) था, इसलिए दिवाली 2025 के 20 अक्टूबर से 19 दिन बाद, 8 नवंबर को पड़ी।

दिवाली की तारीख़ें, साल दर साल

2026

रविवार, 8 नवंबर

2027

शुक्रवार, 29 अक्टूबर

2028

मंगलवार, 17 अक्टूबर

2029

सोमवार, 5 नवंबर

2030

शनिवार, 26 अक्टूबर

दिवाली 2026 के पाँच दिन

  1. 6 नवंबर
    धनतेरस, शुक्रवार
    पहला दिन। सोना, चांदी या नया बर्तन ख़रीदा जाता है, और शाम को यम के नाम का दीया घर के बाहर रखा जाता है। ज्वैलर्स देर तक खुले रहते हैं।
  2. 8 नवंबर
    छोटी दिवाली, रविवार
    नरक चतुर्दशी। 8 तारीख़ के सूर्योदय पर चतुर्दशी चल रही है, इसलिए तेल स्नान उसी सुबह होगा। शाम तक अमावस्या लग जाती है।
  3. 8 नवंबर
    लक्ष्मी पूजा, रविवार
    मुख्य दिन। दिल्ली में लक्ष्मी पूजा शाम 5:54–7:50 के बीच होगी।
  4. 10 नवंबर
    गोवर्धन पूजा, मंगलवार
    अन्नकूट। कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने की याद में अन्न का पहाड़ सजाया जाता है। इसी दिन गुजराती नववर्ष (बेस्तु वरस) भी है।
  5. 11 नवंबर
    भाई दूज, बुधवार
    आख़िरी दिन। बहनें भाइयों को तिलक लगाती हैं और खाना खिलाती हैं।

मुहूर्त का मतलब, आसान भाषा में

मुहूर्त किसी काम को शुरू करने का शुभ समय है। लक्ष्मी पूजा के लिए दो चीज़ें एक साथ चाहिए। पहली है प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के बाद का समय, जब माना जाता है कि लक्ष्मी घर-घर आती हैं। दूसरी है स्थिर लग्न, ताकि जिस धन की प्रार्थना की जा रही है वह घर में टिके। चार लग्न स्थिर माने जाते हैं: वृश्चिक, कुंभ, वृषभ और सिंह।

लग्न वह राशि है जो उस पल पूर्व में उदय हो रही हो, और यह लगभग हर दो घंटे में बदलती है। 2026 में दिवाली की शाम स्थिर लग्न वृषभ है, नई दिल्ली में 5:54 से 7:50 बजे तक। यह पूरी तरह प्रदोष काल (लगभग 5:31–8:09) के भीतर है। 5:54 पर पहला दीया जलाइए। आप ठीक समय पर हैं।

अगर शाम का समय आपके घर के लिए मुश्किल हो, तो उसी दिन दो और स्थिर लग्न हैं: कुंभ लग्न, दोपहर 1:26–2:54, और सिंह लग्न, 9 नवंबर की रात 12:25–2:42।

चौघड़िया क्या है, और यह लग्न मुहूर्त से कैसे अलग है

चौघड़िया समय चुनने का आसान तरीका है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक, और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक, दोनों को आठ-आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। अमृत, शुभ और लाभ अच्छे माने जाते हैं, चर सामान्य है, और उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं। पहला भाग किस नाम से शुरू होगा, यह उस दिन के वार से तय होता है।

पहले यह यात्रा का समय देखने के लिए था। निकालना आसान है, तो लोग इसे हर तरह के शुभ काम के लिए देखने लगे। इसके लिए सिर्फ़ सूर्योदय और सूर्यास्त चाहिए, इसलिए ऊपर का कैलकुलेटर आपके शहर का चौघड़िया भी दिखा देता है।

दिवाली 2026 की रात नई दिल्ली में शुभ, अमृत और चर सूर्यास्त से रात 10:27 बजे तक लगातार हैं। 5:54–7:50 वाला मुहूर्त छूट जाए, तो आमतौर पर यही समय लिया जाता है।

दिल्ली का समय आपके शहर में क्यों नहीं चलता

प्रदोष काल सूर्यास्त से बंधा है, और लग्न इससे कि शहर नक़्शे पर कहाँ है। भारत की घड़ी एक है, पर देश पूर्व से पश्चिम तक बहुत चौड़ा है। 8 नवंबर को कोलकाता में सूरज दिल्ली से लगभग आधा घंटा पहले डूबेगा, और मुंबई में आधा घंटा बाद। लग्न भी कोलकाता में पहले और मुंबई में बाद में आता है। सूर्यास्त और प्रदोष काल के लिए ऊपर कैलकुलेटर में अपना शहर चुनिए, और लग्न का ठीक मिनट स्थानीय पंचांग से देखिए।

पाँच दिन: धनतेरस, गोवर्धन पूजा और भाई दूज

काउंटडाउन और पूरी गाइड: धनतेरस 2026 · छोटी दिवाली 2026 · गोवर्धन पूजा 2026 · भाई दूज 2026.

लक्ष्मी पूजा मुख्य रात है, पर दिवाली पाँच दिन चलती है, और इनमें से तीन दिनों का अपना मुहूर्त है। नीचे के समय नई दिल्ली के हैं, और आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त के साथ बदलते हैं।

धनतेरस: शुक्रवार, 6 नवंबर, शाम 6:02–7:57

धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी पर है, जो 6 तारीख़ सुबह 10:30 से 7 तारीख़ सुबह 10:47 तक रहती है। शाम सिर्फ़ 6 तारीख़ की इसके भीतर आती है, और धनतेरस की पूजा शाम को होती है। मुहूर्त प्रदोष काल (5:33–8:09) के भीतर का वृषभ लग्न वाला हिस्सा है।

परंपरा धातु ख़रीदने की है। सोना-चांदी सबसे ऊपर माने जाते हैं, पर पुराना और रोज़मर्रा वाला रूप स्टील या पीतल का बर्तन है। इसका संबंध धन्वंतरि से है, देवताओं के वैद्य, जो समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर निकले थे। घर में नया बर्तन आना उसी की याद है। वैसे ख़रीदारी एक रिवाज है, पूजा की शर्त नहीं।

एक दूसरी, शांत रस्म भी है: यम दीपम। सूर्यास्त के बाद एक दीया जलाकर मुख्य दरवाज़े के बाहर दक्षिण की ओर रखा जाता है, जो यम की दिशा है। यह घर से अकाल मृत्यु दूर रखने की प्रार्थना है। व्यस्त शाम में यह आसानी से छूट जाता है, इसलिए दीया और तेल दोपहर में ही दरवाज़े के पास रख दीजिए।

गोवर्धन पूजा: मंगलवार, 10 नवंबर, सुबह 6:40–8:50

गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर है। तिथि 9 नवंबर दोपहर 12:31 से 10 नवंबर दोपहर 2:00 तक है, इसलिए 10 तारीख़ ही वह दिन है जिसकी सुबह इसके भीतर आती है। दिवाली की ज़्यादातर रस्मों से उलट, यह सुबह की पूजा है, प्रातःकाल मुहूर्त में।

यह उस दिन की याद है जब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर सात दिन तक थामे रखा और इंद्र की भेजी बारिश से वृंदावन को बचाया। गाँववालों ने दूर के देवता की जगह उस पर्वत और गायों का सम्मान चुना था, जो उन्हें पालती थीं। घर पर गोबर या मिट्टी से छोटा पर्वत बनाकर सजाया जाता है और उसके चारों ओर भोग रखा जाता है। मंदिरों में यह पर्वत भोजन का होता है: अन्नकूट, यानी "अन्न का पहाड़", परंपरा से छप्पन भोग। नाथद्वारा, वृंदावन और मथुरा इसके बड़े आयोजनों के लिए जाने जाते हैं। यही तिथि बेस्तु वरस, यानी गुजराती नववर्ष, भी है, जब व्यापारी चोपड़ा पूजन वाले नए बहीखाते खोलते हैं।

भाई दूज: बुधवार, 11 नवंबर, दोपहर 1:10–3:20

भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया पर है, जो 10 नवंबर दोपहर 2:00 से 11 नवंबर दोपहर 3:53 तक है। तिलक अपराह्न में लगता है, यानी दिन के पाँच बराबर हिस्सों में से चौथे में। इसलिए यह आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों से बदलता है।

इसका दूसरा नाम, यम द्वितीया, इसकी कथा बताता है। यम लंबे समय बाद इस दिन अपनी बहन यमुना के घर आए। यमुना ने तिलक, आरती और भोजन से उनका स्वागत किया। यम ने वरदान दिया कि इस दिन जो भाई बहन से तिलक लगवाए, उसे अकाल मृत्यु नहीं आएगी। इसीलिए भाई बहन के घर जाता है। महाराष्ट्र में इसे भाऊ बीज और बंगाल में भाई फोंटा कहते हैं।

यह रक्षाबंधन जैसा त्योहार नहीं है। राखी पर बहन भाई की कलाई पर धागा बाँधती है। भाई दूज पर कोई धागा नहीं होता, बस तिलक, आरती और भोजन। महाराष्ट्र और हरियाणा के कुछ हिस्सों में जो बहन भाई के पास नहीं पहुँच पाती, वह चाँद की आरती करती है।

दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ, संदेश व इमेज

किसी भी कार्ड पर टैप कीजिए। वह कॉपी हो जाएगा, फिर मैसेज, स्टेटस या कार्ड में चिपका दीजिए।

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शुभ दीपावली की तस्वीर, दीयों के साथ शुभकामना संदेशशुभ दीपावली की तस्वीर, हिन्दी और अंग्रेज़ी मेंहैप्पी दिवाली की तस्वीर, रोशनी की जीत का संदेश

दिवाली की शुभकामना कैसे दें

सबसे आम अभिवादन "शुभ दीपावली" या "हैप्पी दिवाली" है। "दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ" थोड़ा औपचारिक है और सहकर्मियों व बड़ों के लिए ठीक बैठता है। व्यापार वाले "शुभ लाभ" भी कहते हैं। दक्षिण भारत में "दीपावली" ज़्यादा सुनाई देता है और उत्तर में "दिवाली"। सामने वाला जो नाम बोलता है, वही चुनिए।

संदेश लक्ष्मी पूजा की शाम, रविवार 8 नवंबर को भेजिए। कई दिन पहले भेजा संदेश बाक़ी फ़ॉरवर्ड के ढेर में दब जाता है।

दिवाली उपहार: बजट और रिश्ते के अनुसार

पाँचों दिनों की अपनी गिफ़्टिंग परंपरा है, और उसे मान लें तो आधे फ़ैसले अपने आप हो जाते हैं। धनतेरस, 6 नवंबर, धातु का दिन है, जैसे सोना, चांदी, स्टील के बर्तन या कोई उपकरण। लक्ष्मी पूजा, 8 नवंबर, मिठाई, दीये और सजावट का दिन है, जो मिलने जाते समय दी जाती है। भाई दूज, 11 नवंबर, भाई-बहन के तोहफ़ों के साथ त्योहार पूरा करता है। जो जल्दी ख़राब हो सकता है, उसे 8 नहीं, 6 नवंबर तक पहुँचने के हिसाब से ऑर्डर कीजिए। दिवाली वाले हफ़्ते पूरे देश में कूरियर रेंगने लगते हैं।

₹500 से कम

ये चीज़ें पड़ोसियों, बिल्डिंग स्टाफ़, ऑफ़िस टीम और बिना बताए आ जाने वाले रिश्तेदारों के लिए हैं। एक साथ कई ख़रीद लीजिए और कुछ दरवाज़े के पास रख लीजिए।

₹500–₹2,000

यह रेंज बड़े परिवार, क़रीबी सहकर्मियों और उन लोगों के लिए ठीक है जिनके सोफ़े पर आप बैठने वाले हैं।

₹2,000 से ज़्यादा

यह रेंज नज़दीकी परिवार, ससुराल वालों और धनतेरस की ख़रीदारी के लिए है। यहाँ धातु ख़रीदने की परंपरा ही ज़्यादातर फ़ैसला कर देती है।

रिश्ते के अनुसार

किसके लिएक्या सही रहेगा
माता-पिता व ससुराल वालेपूजा सामग्री, या धनतेरस पर ख़रीदा चांदी का सिक्का। यहाँ नयेपन से ज़्यादा परंपरा मायने रखती है।
भाई-बहन व चचेरे-ममेरेकपड़े, या कुछ निजी। यहाँ पारंपरिक से हटकर उपहार बेहतर लगता है।
सहकर्मी व क्लाइंट्सड्राई फ्रूट या मिठाई हैम्पर। सब बाँटकर खा सकते हैं, और साइज़ का अंदाज़ा नहीं लगाना पड़ता।
पड़ोसी व बिल्डिंग स्टाफ़दीये, मोमबत्तियाँ, या ₹500 से कम का मिठाई का डिब्बा। एक जैसे कई ख़रीद लीजिए और ज़्यादा मत सोचिए।
बच्चेबच्चों के एथनिक सेट, या लाइट्स और सजावट जो वे लगवाने में मदद करें। खुली लौ वाली चीज़ों से बचिए।
दूर रहने वाला परिवारजो चपटा पैक होकर जा सके। ड्राई फ्रूट और सजावट सफ़र झेल लेते हैं। मिठाई नहीं झेलती।

लिंक किसी रिटेलर की साइट पर नए टैब में प्रोडक्ट सर्च खोलते हैं। ये सादे सर्च लिंक हैं, इनमें न ट्रैकिंग है न कमीशन। क़ीमतें मोटा अंदाज़ा हैं, पक्की नहीं।

दिवाली 2026, अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिवाली 2026 कब है?

दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक है। पाँच दिन का त्योहार 6 नवंबर को धनतेरस से शुरू होकर 11 नवंबर को भाई दूज पर पूरा होता है।

दिवाली 2026 में कितने दिन बाकी हैं?

ऊपर का काउंटडाउन 8 नवंबर 2026 की शाम 5:54 तक गिनता है, जब मुहूर्त शुरू होता है। यह आधी रात तक नहीं, पूजा शुरू होने के पल तक की गिनती है।

दिवाली 8 नवंबर को है या 9 नवंबर को?

8 नवंबर को। 9 की सुबह भी अमावस्या चल रही होती है, इसलिए कुछ कैलेंडर उसे 9 तारीख़ पर छापते हैं। लक्ष्मी पूजा के लिए सूर्यास्त के समय अमावस्या चाहिए, और 9 की शाम तक वह ख़त्म हो चुकी होती है। तैयारी 8 की कीजिए।

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली के लिए 8 नवंबर 2026 को शाम 5:54 से 7:50 तक, यानी 1 घंटा 56 मिनट। यह प्रदोष काल के भीतर वृषभ (स्थिर) लग्न वाला हिस्सा है। प्रदोष काल आपके शहर के सूर्यास्त से चलता है, और लग्न इस पर निर्भर है कि शहर नक़्शे पर कहाँ है। इसलिए कोलकाता या मुंबई में दिल्ली का समय आधा घंटा या ज़्यादा खिसक जाता है।

दिवाली की तारीख़ हर साल क्यों बदलती है?

क्योंकि दिवाली चाँद से चलती है। बारह चंद्र महीने लगभग 354 दिन के होते हैं, सौर वर्ष से क़रीब 11 दिन कम। हर दो-तीन साल में अधिक मास जुड़ता है, और तारीख़ कुछ हफ़्ते आगे चली जाती है। 2026 में अधिक मास था, इसलिए दिवाली 2025 के 20 अक्टूबर से खिसककर 8 नवंबर पर आई।

2026 में छोटी दिवाली और लक्ष्मी पूजा एक ही दिन क्यों हैं?

क्योंकि 8 नवंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी है और सूर्यास्त के समय अमावस्या। छोटी दिवाली का तेल स्नान सूर्योदय से पहले होता है और लक्ष्मी पूजा शाम को, इसलिए दोनों 8 को पड़ते हैं। चतुर्दशी 7 नवंबर सुबह 10:47 से 8 नवंबर सुबह 11:27 तक है।

क्या दिवाली और दीपावली अलग हैं?

नहीं, ये एक ही त्योहार के दो नाम हैं। दीपावली मूल शब्द है, दीप और आवली, यानी दीयों की कतार। दिवाली उसी का बोलचाल वाला रूप है। दक्षिण में ज़्यादातर दीपावली कहा जाता है और उत्तर में दिवाली।

धनतेरस 2026 पूजा मुहूर्त क्या है?

धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को है, और नई दिल्ली में पूजा मुहूर्त शाम 6:02 से 7:57 बजे तक है। यह प्रदोष काल (5:33 से 8:09) के भीतर वृषभ लग्न वाला हिस्सा है। त्रयोदशी 6 तारीख़ सुबह 10:30 से 7 तारीख़ सुबह 10:47 तक है।

धनतेरस पर घर के बाहर दीया क्यों रखा जाता है?

यह यम दीपम है, मुख्य पूजा से अलग एक रस्म। सूर्यास्त के बाद एक दीया जलाकर मुख्य दरवाज़े के बाहर दक्षिण की ओर रखा जाता है। यह यम से प्रार्थना है कि घर में अकाल मृत्यु न आए।

गोवर्धन पूजा 2026 कब है?

गोवर्धन पूजा 2026 मंगलवार, 10 नवंबर को है, लक्ष्मी पूजा के दो दिन बाद। यह सुबह की पूजा है, और नई दिल्ली में प्रातःकाल मुहूर्त 6:40 से 8:50 बजे तक है। इसी दिन अन्नकूट और गुजराती नववर्ष (बेस्तु वरस) भी है।

भाई दूज 2026 कब है?

भाई दूज 2026 बुधवार, 11 नवंबर को है, दिवाली का आख़िरी दिन। नई दिल्ली में अपराह्न तिलक मुहूर्त दोपहर 1:10 से 3:20 बजे तक है। द्वितीया 10 नवंबर दोपहर 2:00 से 11 नवंबर दोपहर 3:53 तक है।

भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या अंतर है?

रस्में अलग हैं। रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधती है। भाई दूज पर कोई धागा नहीं होता: बहन तिलक लगाती है, आरती करती है और खाना खिलाती है, आमतौर पर अपने घर पर। रक्षाबंधन अगस्त में श्रावण पूर्णिमा पर आता है, और भाई दूज दिवाली का आख़िरी दिन है।

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय चुनने का आसान तरीका है, जिसमें दिन और रात को आठ-आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। अमृत, शुभ और लाभ अच्छे माने जाते हैं, चर सामान्य है, और उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं। दिवाली 2026 की रात दिल्ली में शुभ, अमृत और चर सूर्यास्त से रात 10:27 बजे तक लगातार हैं। 7:50 वाला मुहूर्त छूट जाए, तो आमतौर पर यही समय लिया जाता है।

क्या लक्ष्मी पूजा और काली पूजा एक ही रात होती हैं?

हाँ, दोनों कार्तिक अमावस्या पर हैं, यानी 8 नवंबर 2026 को। बस पूजा और समय अलग हैं। ज़्यादातर भारत में शाम को प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा होती है। पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और त्रिपुरा में उसी रात निशीथ काल में काली पूजा होती है, जो दिल्ली में रात 11:39 से 12:31 तक है। कई बंगाली परिवार दोनों करते हैं।