छठ पूजा 2026: 13–16 नवंबर, अर्घ्य का समय
छठ पूजा 2026 में 13–16 नवंबर तक है। संध्या अर्घ्य रविवार, 15 नवंबर को सूर्यास्त पर है, जो दिल्ली में शाम 5:28 बजे है। पटना में सूरज 27 मिनट पहले, शाम 5:01 पर डूबता है। अगर आप पानी में खड़े होंगे, तो नीचे अपने शहर का सूर्यास्त देखिए।
festcountdown टीम ने दृक गणित पंचांग से जाँचा, आख़िरी बार 17 सितंबर 2026 को।
चारों दिन
- 13 नवंबरनहाय खाय, शुक्रवारव्रत शुरू होता है। नदी या तालाब में स्नान, और एक सात्विक भोजन, आमतौर पर लौकी, चने की दाल और चावल। घर की पूरी सफ़ाई होती है, और यहाँ से रसोई पूरी तरह शुद्ध रखी जाती है।
- 14 नवंबरखरना, शनिवारपूरे दिन बिना पानी, और सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर और रोटी से व्रत खुलता है। यह भोजन ख़त्म होते ही निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, और 16 की सुबह तक न खाना, न पानी।
- 15 नवंबरसंध्या अर्घ्य, रविवारमुख्य दिन। परिवार दोपहर में घाट पहुँचते हैं और कमर तक पानी में खड़े होकर, ठेकुआ, फल और गन्ने की टोकरियों के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। दिल्ली में सूर्यास्त शाम 5:28 पर है।
- 16 नवंबरउषा अर्घ्य, सोमवारभोर से पहले परिवार उसी पानी में लौटकर उगते सूर्य को अर्घ्य देता है। इसके ठीक बाद प्रसाद से 36 घंटे का व्रत खुलता है। दिल्ली में सूर्योदय सुबह 6:44 पर है।
अर्घ्य का समय
- संध्या अर्घ्यसूर्यास्त पर, 15 नवंबरइसका मतलब: डूबते सूर्य को शाम का अर्घ्य, छठ के मुख्य दिन।
- उषा अर्घ्यसूर्योदय पर, 16 नवंबरइसका मतलब: उगते सूर्य को सुबह का अर्घ्य। व्रत ठीक इसके बाद खुलता है।
- षष्ठी तिथि14 नवंबर रात 11:23 से 16 नवंबर रात 2:00 तकइसका मतलब: कार्तिक का छठा चंद्र दिन। "छठ" नाम "छठी" से आया है, इसलिए इसे सूर्य षष्ठी भी कहते हैं।
मुहूर्त और चौघड़िया कैलकुलेटर
रविवार, 15 नवंबर 2026 · संध्या अर्घ्य · शहर चुनते ही समय बदल जाएगा
छठ में यहाँ दिखा सूर्यास्त ही अर्घ्य का समय है। अपना शहर चुनिए और उसी सूर्यास्त को मानिए।
दिन का चौघड़िया
रात का चौघड़िया
सूर्योदय, सूर्यास्त, प्रदोष काल और चौघड़िया का समय आपके चुने हुए शहर के हिसाब से है। वृषभ काल जैसे लग्न मुहूर्त नई दिल्ली के समय से दिए गए हैं।
छठ पूजा 2026 कब है?
छठ पूजा 2026 का मुख्य दिन रविवार, 15 नवंबर है, कार्तिक शुक्ल षष्ठी। षष्ठी यानी छठा चंद्र दिन, और नाम यहीं से आया (छठी)। तिथि 14 नवंबर रात 11:23 से 16 नवंबर रात 2:00 बजे तक है। छठ हमेशा दिवाली की अमावस्या के बाद छठे चंद्र दिन पर होती है। 2026 में यह 8 नवंबर की दिवाली से एक हफ़्ता बाद है।
छठ में आपका शहर किसी भी और त्योहार से ज़्यादा क्यों मायने रखता है
ज़्यादातर त्योहारों में मुहूर्त सूर्योदय या सूर्यास्त से निकाली गई एक अवधि होती है, और कुछ मिनट इधर-उधर चल जाता है। छठ में ऐसा नहीं है। अर्घ्य डूबते और फिर उगते सूर्य को दिया जाता है, इसलिए अनुष्ठान का पल ही सूर्यास्त और सूर्योदय है।
इसीलिए जहाँ छठ मनाई जाती है, वहाँ ज़्यादातर जगह दिल्ली का समय ग़लत समय है। 15 नवंबर को पटना में सूरज शाम 5:01 पर डूबता है, दिल्ली से 27 मिनट पहले। नदी में खड़े-खड़े पूरा पल निकल जाने के लिए इतना काफ़ी है। ऊपर कैलकुलेटर में अपना शहर चुनिए और उसी सूर्यास्त को मानिए।
व्रत, और इसे सबसे कठिन क्यों कहते हैं
छठ का व्रत निर्जला है, यानी पानी भी नहीं। यह 14 नवंबर की शाम खरना का भोजन ख़त्म होते ही शुरू होता है और 16 की सुबह उषा अर्घ्य के बाद ही खुलता है, लगभग 36 घंटे बाद। दो रातें और एक पूरा दिन, न खाना, न पानी।
इसका बड़ा हिस्सा घाट पर, नवंबर के नदी के पानी में कमर तक खड़े होकर बीतता है, अक्सर वहाँ तक नंगे पैर चलकर। प्रसाद ऐसी रसोई में सख़्त शुद्धता से बनता है जिसमें कोई और नहीं जाता। ठेकुआ, यानी गेहूँ और गुड़ का कड़ा बिस्किट, इसकी पहचान है, जो फल और गन्ने के साथ बाँस की टोकरियों में पानी तक जाता है। अगर परिवार को घाट तक आप ले जा रहे हैं, तो शाम 4 बजे से काफ़ी पहले निकलिए। पानी के पास की हर सड़क भरी होगी।
एक बात छठ को और अलग करती है। किसी भी चरण में पुजारी की ज़रूरत नहीं पड़ती। व्रती हर हिस्सा ख़ुद करते हैं, और अर्घ्य सीधे सूर्य को देते हैं, बीच में कोई मूर्ति नहीं।
छठ पूजा 2026: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
छठ पूजा 2026 कब है?
छठ पूजा 2026 चार दिन की है, शुक्रवार 13 नवंबर से सोमवार 16 नवंबर तक। मुख्य दिन रविवार, 15 नवंबर है, जब संध्या अर्घ्य सूर्यास्त पर होगा, दिल्ली में शाम 5:28 बजे। उगते सूर्य को उषा अर्घ्य सोमवार, 16 नवंबर की भोर में दिया जाएगा।
छठ पूजा 2026 में कितने दिन बाकी हैं?
ऊपर का काउंटडाउन रविवार, 15 नवंबर 2026 के सूर्यास्त पर संध्या अर्घ्य तक गिनता है। अर्घ्य का समय ख़ुद सूर्यास्त है, इसलिए हर शहर में अलग होता है। अपने शहर का समय इस पेज के कैलकुलेटर से देखिए।
छठ पूजा के चार दिन कौन-से हैं?
पहला दिन, 13 नवंबर, नहाय खाय है: स्नान और एक सात्विक भोजन। दूसरा दिन, 14 नवंबर, खरना है: दिन भर बिना पानी, सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर, और उसके ख़त्म होते ही 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू। तीसरे दिन, 15 नवंबर को, घाट पर डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है। चौथे दिन, 16 नवंबर को, सूर्योदय पर उषा अर्घ्य होता है, और फिर व्रत खुलता है।
छठ पूजा में अर्घ्य का समय क्या है?
अलग से कोई मुहूर्त नहीं है। अर्घ्य का समय सूर्यास्त और सूर्योदय ही है: नई दिल्ली में 15 नवंबर को शाम 5:28 और 16 नवंबर को सुबह 6:44। पटना में 15 तारीख़ को सूर्यास्त शाम 5:01 पर है, यानी 27 मिनट पहले। दिल्ली का समय नहीं, इस पेज के कैलकुलेटर से अपने शहर का समय देखिए।
छठ को सबसे कठिन हिंदू व्रत क्यों माना जाता है?
निर्जला हिस्से की वजह से। 14 नवंबर की शाम खरना के भोजन के बाद व्रती 16 की सुबह उषा अर्घ्य तक न खाना खाते हैं, न पानी पीते हैं, यानी लगभग 36 घंटे। इसका बड़ा हिस्सा नवंबर के ठंडे पानी में कमर तक खड़े होकर बीतता है, अक्सर घाट तक नंगे पैर चलने के बाद।
छठ पूजा में किसकी पूजा होती है?
सूर्य देव और छठी मैया की, जिन्हें उनकी बहन और बच्चों की रक्षक माना जाता है। अर्घ्य सीधे सूर्य को दिया जाता है, बीच में कोई मूर्ति नहीं होती। किसी भी चरण में पुजारी की ज़रूरत नहीं पड़ती, क्योंकि व्रती ख़ुद पूरा अनुष्ठान करते हैं।
छठ पूजा कहाँ मनाई जाती है?
मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के बड़े हिस्से में। वहाँ से निकले परिवार इसे बहुत दूर तक ले गए हैं। दिल्ली और मुंबई में घाटों पर भारी भीड़ होती है, और मॉरीशस, UAE, अमेरिका और ब्रिटेन के बिहारी समुदाय भी इसे मनाते हैं। छठ हमेशा पानी के पास होती है, चाहे नदी हो, तालाब हो या उस दिन के लिए भरा गया कुंड।
